PM Modi Meets South African President Ramaphosa: G20 Agenda & India–South Africa Partnership
📰 PM Narendra Modi Meets South African President Cyril Ramaphosa Ahead of G20: Strengthening South–South Cooperation
Updated on: November 25 , 2025
By Pathprerna News Desk
बैठक के केंद्र में वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, समावेशी विकास, अंतरराष्ट्रीय ऋण-ढांचा सुधार और Global South देशों के लिए न्यायसंगत वित्तीय पहुँच जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से शामिल रहे। दोनों नेताओं ने साफ तौर पर इस बात पर सहमति जताई कि G20 को केवल विकसित दुनिया की प्राथमिकताओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे उन देशों की आवाज़ बनना चाहिए जिनका वैश्विक आर्थिक निर्णय-प्रक्रियाओं पर प्रभाव कम है, जबकि जनसंख्या और विकासात्मक चुनौतियाँ कहीं अधिक हैं। मोदी और रामाफोसा ने माना कि वैश्विक मूल्य-श्रंखलाओं में असमानता, तकनीकी असमानताएँ और जलवायु वित्त की कमी ऐसे मुद्दे हैं जिन पर G20 को एक स्पष्ट, परिणाम-उन्मुख ढांचा तैयार करना होगा।
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| Infographic showing shared priorities between India and South Africa. |
भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच सांस्कृतिक, राजनीतिक और ऐतिहासिक संबंध पहले से गहरे रहे हैं—BRICS में साझेदारी हो, IORA जैसे इंडो-पैसिफिक मंचों में सहयोग हो, या WTO में संयुक्त रुख—दोनों देश अक्सर समान वैश्विक दृष्टिकोण रखते हैं। इस मुलाकात में रक्षा-सहयोग, फार्मा, हेल्थकेयर सप्लाई चेन, मिनरल-सिक्योरिटी, और सोलर-ऊर्जा साझेदारी पर भी बातचीत हुई। दक्षिण अफ्रीका, जिसे critical minerals का विशाल स्रोत माना जाता है, भारत के ऊर्जा संक्रमण और टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए एक रणनीतिक सहयोगी बनकर उभर रहा है। meeting में इस दिशा में साझेदारी बढ़ाने का वादा किया गया।
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| Infographic showing key themes of Modi–Ramaphosa G20 meeting |
जलवायु परिवर्तन, विशेषकर “Loss and Damage Fund” पर, भारत और दक्षिण अफ्रीका दोनों ने समान चिंताएँ व्यक्त कीं। दोनों नेताओं ने यह स्पष्ट रूप से कहा कि विकसित देशों द्वारा जलवायु वित्त के वादों को पूरा किए बिना हरित संक्रमण की वैश्विक प्रक्रिया अधूरी रहेगी। इस संदर्भ में उन्होंने COP-30 से पहले एक संयुक्त स्थिति बनाने की संभावना पर भी चर्चा की ताकि Global South एक संगठित आवाज़ के रूप में पेश हो सके।
बैठक के बाद की आधिकारिक व्याख्याओं से यह स्पष्ट है कि भारत चाहता है कि G20 एक “Consensus-Driven Leadership Group” के रूप में काम करे, न कि geopolitics का युद्धक्षेत्र बने। दक्षिण अफ्रीका का दृष्टिकोण भी इसी दिशा में है—यानी बहुपक्षीय व्यवस्था को संतुलित, लोकतांत्रिक और अधिक प्रतिनिधिक बनाना। यही कारण है कि UNSC सुधार पर भी दोनों नेताओं ने समान विचार साझा किए, और इस दिशा में प्रयासों को आगे बढ़ाने की बात कही।
भारत और दक्षिण अफ्रीका की यह बातचीत केवल G20 की तैयारी नहीं, बल्कि Global South की सामूहिक आकांक्षाओं का खाका भी है। दोनों देशों का मानना है कि 21वीं सदी की राजनीति और अर्थव्यवस्था अब उन आवाज़ों को केंद्र में लाए बिना आगे नहीं बढ़ सकती, जिन्हें दशकों तक हाशिये पर रखा गया। इस बैठक ने न केवल द्विपक्षीय साझेदारी को नया बल दिया है, बल्कि यह भी संकेत दिया है कि G20 की दिशा आने वाले वर्षों में किस हद तक दक्षिण-दक्षिण संवाद के आधार पर तय हो सकती है।
Source: Public reports, official data, and verified open sources.
Category - Diplomacy
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