India-US Emergency Defence Deal 2025: Javelin & Excalibur Systems to India
📰 India-US Emergency Defence Deal 2025: What it Means for India’s Military Edge
Updated on: November 23 , 2025
By Pathprerna News Desk
Deal Details: What’s Included?
-
अमेरिका ने भारत की ओर से 216 Excalibur M982A1 गाइडेड प्रोजेक्टाइल्स और 100 यूनिट Javelin System तक की मांग को मंजूरी दी है।
-
इस समझौते की राशि लगभग US $ 93 million (≈ ₹7,700 crore) है, जिसमें Javelin के लिए ~US $ 45.7 million और Excalibur के लिए ~US $ 47.1 million शामिल हैं।
-
ट्रांसफर में शामिल है: लॉच यूनिट्स, इलेक्ट्रॉनिक फायर कंट्रोल सिस्टम्स, प्लेटफॉर्म इंटीग्रेशन किट्स, साथ ही लॉजिस्टिक्स और प्रोग्राम सपोर्ट।
-
अमेरिकी Defense Security Cooperation Agency (DSCA) ने बयान में कहा है कि यह बिक्री अमेरिका-भारत रणनीतिक संबंधों को मजबूत करेगी और भारत को क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में मदद करेगी।
Why This Deal is ‘Emergency’ & Strategic
1. Border Tensions और तेज़ी
भारत-चीन (LAC) क्षेत्र और भारत-पाकिस्तान सीमाई क्षेत्रों में गतिरोध और बढ़ते हुए खतरे को ध्यान में रखते हुए यह सौदा तत्काल सुरक्षा बढ़ावा देने वाला है।
2. Technology Upgrade और Interoperability
Javelin और Excalibur जैसे उपकरण भारतीय सेना को उन्नत फायरपावर देंगे। Excalibur को पहले M-777 हॉवित्ज़र में प्रयोग में लाया जा चुका है।
3. US-India Strategic Partnership Deepening
इस सौदे के साथ अमेरिका ने भारत को ‘Major Defence Partner’ के रूप में आगे बढ़ाने का संकेत दिया है, जिससे दोनों देशों की रक्षा उद्योग और टेक्नोलॉजी साझेदारी भी मजबूत होगी।
Implications for India
(a) Tactical Edge Increased
-
Javelin anti-tank सिस्टम से भारत को थल क्षेत्र में बख्तरबंद टैंक व अन्य प्लेटफार्म के खिलाफ बेहतर क्षमता मिलेगी।
-
Excalibur गाइडेड गोला-बारूद से पीठ-से-पीछे निशाना लगाना आसान होगा, खासकर पहाड़ी इलाकों में।
(b) Strategic Signal Sent
यह सौदा चीन को संकेत देता है कि भारत केवल अपने आप नहीं खड़ा है — पीछे अमेरिका जैसे साझेदार हैं।
(c) Defence Industry Boost
सौदा भारत-में रक्षा उत्पादन की दिशा को भी बढ़ावा दे सकता है, क्योंकि लॉजिस्टिक्स और सपोर्ट पैकेज शामिल हैं।
(d) Budget & Procurement Impacts
₹7,700 crore से अधिक की यह खरीद भारत के रक्षा बजट पर प्रभाव डाल सकती है, लेकिन यह तत्काल रणनीतिक जरूरत से जुड़ी है।
Challenges and Considerations
-
इस खरीद को “Make in India” नीति से किस हद तक जोड़ा जाएगा, यह देखना होगा।
-
चीन–पाकिस्तान जैसी प्रतिस्पर्धियों द्वारा प्रतिक्रियाएँ संभव हैं, जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता बने रहने का जोखिम है।
-
लॉजिस्टिक्स, प्रशिक्षण और ऑपरेशनल इंटीग्रेशन जैसे पहलुओं पर ध्यान देना आवश्यक है ताकि खरीदे गए सिस्टम सही तरीके से इस्तेमाल हो सकें।
Conclusion
भारत-अमेरिका के बीच यह हमारी रक्षा साझेदारी का एक नया अध्याय है। यह केवल हथियारों की खरीद नहीं है — यह भारतीय रक्षा रणनीति का त्वरित उन्नयन और क्षेत्रीय संतुलन की दिशा में एक स्पस्ट संदर्भ बिंदु है।
2025–26 में आने वाले महीनों में इस सौदे का प्रभाव स्पष्ट होगा और यह इस बात का संकेत देगा कि भारत किस प्रकार से अपनी सीमाओं, उद्योग और रणनीतिक भागीदारों के माध्यम से भविष्य की चुनौतियों का सामना करेगा।
Source: Public reports, official data, and verified open sources.
Category - Defence AND Technology
Also Read |NASA vs ISRO: दो अलग यात्राएँ और नई वैश्विक अंतरिक्ष साझेदारी | Detailed Comparison 2025


Comments
Post a Comment