बढ़ता धुंध का संकट: दिल्ली का वायु प्रदूषण और सार्वजनिक स्वास्थ्य — कारणों की गहराई, GRAP की प्रभावशीलता और दीर्घकालीन समाधान
Delhi Toxic Air Emergency, Public Health In Risk नई दिल्ली । नवंबर 2025 में दिल्ली-एनसीआर की हवा फिर ‘ Severe ’ श्रेणी में पहुंच गई। औसत AQI 400+ के पार है, और Commission for Air Quality Management (CAQM) ने GRAP Stage-III लागू किया — निर्माण गतिविधियों पर रोक, वाहनों पर प्रतिबंध, और स्कूलों में ऑनलाइन कक्षाओं की वापसी। यह हर साल दोहराया जाने वाला संकट अब सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल में बदल चुका है। 🩺 सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रभाव: आंकड़े और वास्तविकता PM2.5 एक्सपोज़र से मृत्यु दर में भारी वृद्धि — हर 10 µg/m³ वृद्धि पर स्ट्रोक से मौत का जोखिम 9% बढ़ता है। भारत में हर साल 15 लाख से अधिक मौतें वायु प्रदूषण से जुड़ी मानी जाती हैं, जिनमें NCR का योगदान सबसे ज़्यादा है। बच्चों में असर गंभीर — PM2.5 वृद्धि से एनीमिया (10%), श्वसन संक्रमण (11%) और कम जन्म-भार (5%) बढ़ता है। Local Circles सर्वे (Nov 2025): 80% परिवारों में कम से कम एक सदस्य बीमार, 40% में चार से अधिक सदस्य प्रभावित। 🚗 प्रदूषण के मुख्य स्रोत स्रोत अनुमानित योगदान परिवहन (Transport) 18–39% सड़क ध...