संविधान दिवस 2025: 76 साल बाद भारतीय लोकतंत्र कहाँ खड़ा है?

 📰 भारतीय लोकतंत्र की आज की तस्वीर: उपलब्धियाँ और प्रगति

Updated on: November 27 , 2025

By Pathprerna News Desk



New Delhi|26 नवम्बर 1949 को Constitution of India को अपनाए जाने की स्मृति में मनाया जाने वाला संविधान दिवस, 2025 में 76वीं वर्षगांठ का अवसर है। यह सिर्फ एक ऐतिहासिक तारीख नहीं, बल्कि यह देश की लोकतांत्रिक यात्रा, उसके संघर्ष, विकास और चुनौतियों का सालाना आत्म-मूल्यांकन का दिन भी है। इसलिए इस साल — जब भारत वैश्विक पटल पर तेजी से उभर रहा है — यह देखना महत्वपूर्ण है कि 76 साल बाद हमारा लोकतंत्र किन मोड़ों से गुज़रा है, किन उपलब्धियों से सशक्त हुआ है और किन बाधाओं का अभी सामना कर रहा है।

भारत के संविधान ने सिर्फ़ कानूनों का सेट नहीं रखा — उसने एक नीव रखी — समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता, न्याय और समानता की — जिसने देश को विविधता में एकता की दिशा दी। संविधान सभा में 1946–49 के तीन वर्षों की मेहनत के बाद बनी इस उस संवैधानिक व्यवस्था ने, 26 जनवरी 1950 से लागू होकर, भारत को पूरी दुनिया में सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में स्थापित किया। 


 उपलब्धियाँ और लोकतंत्र की मजबूती

पहली बड़ी उपलब्धि है — आर्थिक बदलावों के बावजूद लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्थिरता। 1991 के आर्थिक उदारीकरण के बाद से भारत ने तेज़ी से विकास किया, लेकिन लोकतांत्रिक ढांचा (लोकतंत्र, संवैधानिक संस्थान, न्यायिक-कानून व्यवस्था) बरकरार रहा। यह सामंजस्य (growth + democracy) पूरे विश्व में भारत को अलग पहचान देता है।

दूसरी, संवैधानिक अधिकार — fundamental rights, equal rights, न्याय, सामाजिक न्याय, जनप्रतिनिधित्व — का सोलिड फ्रेमवर्क है। यह framework आज भी आम नागरिकों, युवाओं, सामाजिक आंदोलन करने वालों, वंचितों, अल्पसंख्यकों के लिए सुरक्षा कवच है। भारत ने decades में कई सामाजिक व लोकतांत्रिक चुनौतियों का सामना किया — लेकिन संविधान का आधार टूटने नहीं दिया गया।

तीसरी, भारत का सामाजिक-संवैधानिक विकास: जबकि देश में आबादी, urbanization, migration, शिक्षा, डिजिटल इंडिया, globalisation जैसे बड़े structural बदलाव आए, फिर भी संविधान-निर्मित framework में adaptation हुआ — fundamental rights, federal structure, independent judiciary, coalition culture — सब कायम रहे।

चौथा, जागरूक नागरिकता और लोकतांत्रिक भागीदारी: पिछले कुछ दशकों में मीडिया, शिक्षा, social media, activism ने नागरिकों को empowered किया। लोगों ने अधिकार, कर्तव्य, संविधान, शासन, transparency आदि पर आवाज़ उठाई। Elections, debates, protests — लोकतांत्रिक संस्कृति अब सिर्फ urban-elite तक सीमित नहीं, गांव-शहर, हर आम नागरिका तक पहुंच चुकी है।

India democratic achievements infographic


 चुनौतियाँ और वह विरासत जिसे बचाए रखना है

लेकिन 76 साल बाद भी लोकतंत्र को कई चुनौतियाँ झेलनी पड़ रही हैं।

सबसे बड़ी चुनौती है — सामाजिक असमानता व आर्थिक असमानता। संविधान का धर्मनिरपेक्ष व समानता-आधारित मॉडल है, लेकिन ground-level पर caste, class, regional disparity, unemployment, agrarian distress जैसी समस्याएँ अभी जिंदा हैं। इनसे संविधान के ideals को लगातार चुनौती मिलती है।

दूसरी चुनौती — धार्मिक, सांप्रदायिक, जातीय तनाव, polarisation, misinformation। लोकतंत्र में बहुलता और diversity संविधान की ताकत है, लेकिन आज polarization, identity-politics, social division बढ़ रहा है — जो संविधान के मूल सिद्धांतों (unity, fraternity, secularism) को कमजोर करता है।

तीसरी — institutions पर growing pressure: न्यायपालिका, प्रेस, लोकतांत्रिक संस्थाएँ, local-governments, civil services — कई बार दल-राजनीति, bureaucracy, corruption, inefficiency के कारण ideal delivery नहीं कर पाते।

चौथी — youth expectations vs reality gap: आज के युवा संसाधन, opportunity, transparency, merit, voice चाहते हैं — लेकिन governance, unemployment, inequality, infrastructure gap के कारण भरोसा प्रभावित होता है।

और आखिरी — globalisation, digital disruption, climate change, economic uncertainty के बीच संविधान-निर्मित व्यवस्था को समय के साथ adapt करना पड़ेगा — ताकि संविधान सिर्फ़ दस्तावेज़ न रहे, बल्कि हर citizen के लिए सुरक्षा, अवसर व न्याय का प्रतीक बना रहे।

Challenges to Indian democracy infographic


 संविधान दिवस 2025 पर क्या करना चाहिए: फिर से प्रतिबद्धता

संविधान दिवस सिर्फ याद करने का दिन नहीं — यह सुधार, जागरूकता और जिम्मेदारी का दिन है।

राष्ट्रीय स्तर पर: संविधान के मूल्यों — न्याय, स्वतंत्रता, समानता, भाईचारा — को बहाल करना।
शिक्षा संस्थानों में: संविधान, नागरिक अधिकार, कर्तव्य, संवैधानिक जागरूकता को पढ़ाना।
नागरिकों के रूप में: अपने अधिकारों व कर्तव्यों को जानना, लोकतंत्र में सक्रिय भाग लेना — वोट देना, informed debate करना, दूसरों के अधिकारों का सम्मान करना।
समाज में: समानता, सामाजिक न्याय, inclusion, diversity का सम्मान करना।


 निष्कर्ष

76 साल बाद, भारतीय लोकतंत्र एक मजबूत संस्थागत आधार पर खड़ा है: संविधान, उसकी मूल-भावनाएँ, लोकतांत्रिक संरचनाएँ — सब मौजूद हैं। लेकिन यह केवल आधार है। लोकतंत्र अपने citizens की जागरूकता, संवेदनशीलता, उत्तरदायित्व और साझा सम्मान से चलता है।

संविधान दिवस 2025 हमें याद दिलाता है — हमने एक महान विरासत पाई है, लेकिन उसे बनाए रखना, उसे जीना, हर रोज़ उसका पालन करना हमारी ज़िम्मेदारी है।


Source: Public reports, official data, and verified open sources.

Category - Democracy and Polity


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