INDIA–AFRICA STRATEGIC PARTNERSHIP 2025: नई विश्व-व्यवस्था में भारत की भूमिका
Updated on: December 11 , 2025
By Pathprerna News Desk
भारत और अफ्रीका, दो ऐसे भू-क्षेत्र हैं जिनकी राजनीतिक सोच, विकास की आवश्यकताएँ और अंतरराष्ट्रीय प्राथमिकताएँ काफी हद तक एक-सी हैं। 2025 में जब वैश्विक व्यवस्था नई शक्ल ले रही है, तकनीकी प्रतिस्पर्धा तेज़ हो चुकी है और मूल्य-आधारित कूटनीति के नए पैमाने तय हो रहे हैं—ऐसे समय में India–Africa Strategic Partnership एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। यह साझेदारी पारंपरिक सहायता-केंद्रित रिश्तों से आगे बढ़कर अब रक्षा सहयोग, खनिज सुरक्षा, समुद्री हितों की रक्षा, व्यापार विस्तार और नव-उद्योगिकरण जैसे उच्च-प्रभाव क्षेत्रों में तेजी से विकसित हो रही है। भारत ने पिछले दशक में अफ्रीका की समुद्री सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई—खासकर piracy-affected क्षेत्रों में। इसके साथ ही, भारतीय नौसेना और कोस्ट गार्ड ने पश्चिम और मध्य-अफ्रीका की नौसेनाओं को training और surveillance capability बढ़ाने में सहयोग दिया। यह maritime coordination न केवल पश्चिमी हिंद महासागर में स्थिरता सुनिश्चित करता है, बल्कि Red Sea, Gulf of Aden और Indo-African trade routes को सुरक्षित रखने में भी निर्णायक साबित हो रहा है।
आर्थिक क्षेत्र में, Africa आज विश्व के सबसे बड़े critical minerals hub के रूप में सामने आ रहा है—lithium, cobalt, rare-earths और strategic metals, जिनकी मांग भारत की clean-energy, battery-economy और semiconductor roadmap में तेज़ी से बढ़ी है। 2025 में होने वाली bilateral बैठकों और trade-corridor negotiations में यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि mutually beneficial supply-chain models विकसित हों, जिनमें sustainability और local development को बराबर वरीयता मिले। इसके साथ digital public goods, fintech solutions, education-tech और startups के माध्यम से youth-centric economic linkages बनाना भारत की Africa policy का महत्वपूर्ण स्तंभ है।
कूटनीतिक स्तर पर यह साझेदारी Global South की सामूहिक आवाज़ को मजबूती देती है। UN reforms, debt-justice, food-security और climate financing जैसे मुद्दों पर भारत और अफ्रीका का संयुक्त रुख एक alternative normative power center निर्मित कर रहा है। यह वैश्विक निर्णय-प्रणाली में पुरानी शक्ति संरचनाओं को चुनौती देता है और एक अधिक न्यायसंगत, बहुध्रुवीय विश्व-व्यवस्था का आधार बनाता है। हालांकि कुछ बड़ी चुनौतियाँ भी हैं—political instability, governance gaps, environmental compliance, sanctions-linked trade risks और technology-transfer safeguards को सावधानीपूर्वक navigate करना पड़ेगा। भारत को अमेरिका, यूरोपीय संघ, रूस और चीन जैसे प्रमुख देशों के बीच संतुलन साधते हुए partnership को आगे बढ़ाना होगा।
इस सबके बावजूद, यह स्पष्ट है कि India–Africa engagement 2035 तक विश्व-व्यापार, हरित प्रौद्योगिकी, maritime power projection और strategic diplomacy का केंद्रीय आधार बनेगी। भारत और अफ्रीका दोनों के लिए यह केवल एक foreign policy chapter नहीं—बल्कि shared ascent का blueprint है, जो आने वाले दशक में दोनों को नए आर्थिक और भू-राजनीतिक आयाम प्रदान करेगा। यह partnership एक संदेश भी देती है कि Global South अब spectator नहीं—policy shaper बनने की स्थिति में है। और इस ऐतिहासिक परिवर्तन में भारत की भूमिका निर्णायक है।
Source: Public reports, official data, and verified open sources.
Category - Diplomacy and IR
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