भारत का राष्ट्रीय सुरक्षा बदलाव: India–Middle East–Europe Corridor से क्या बदलेगा भारत का Global Role?

भारत का राष्ट्रीय सुरक्षा बदलाव: India–Middle East–Europe Corridor

Updated on: December 02 , 2025
By Pathprerna News Desk


भारत 2023 में घोषित IMEC — भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे — अब धीरे-धीरे एक भू-रणनीतिक और आर्थिक रीसेट की दिशा में बढ़ रहा है। यह पहल केवल व्यापार-मार्ग नहीं, बल्कि भारत की वैश्विक स्थिति, ऊर्जा सुरक्षा, supply-chain स्थिरता और यूरोप-मध्य पूर्व-भारत कनेक्टिविटी का मूल आधार बन सकती है।

IMEC की रूप-रेखा 9 सितंबर 2023 को G20 New Delhi Summit में तय हुई थी, और इसमें भारत, अमेरिका, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), यूरोपीय संघ (EU), इटली, फ्रांस और जर्मनी जैसे शक्तिशाली देश शामिल हैं। 

इस परियोजना का उद्देश्य भारत के बंदरगाहों (जैसे मुंद्रा, कांडला, नवी मुंबई) को मध्य पूर्व के प्रमुख पोर्ट्स जैसे UAE-जेबेल अली / फुज़ैरा और सऊदी अरब-दम्मम से जोड़ना है। फिर मध्य पूर्व से रेलवे/रोड नेटवर्क के माध्यम से इज़राइल-हाइफा, जॉर्डन मार्ग होकर यूरोप के पीरियस (ग्रीस), मेसिना (इटली), मार्सिले (फ्रांस) जैसे बंदरगाहों से कनेक्ट करना। 

इस गलियारे में केवल समुद्री मार्ग शामिल नहीं है — बल्कि रेल, सड़क, शिप-टू-रेल लॉजिक, ऊर्जा (हाइड्रोजन पाइपलाइन), डेटा के लिए submarine cables जैसे मल्टी-मॉडल नेटवर्क की कल्पना की गई है। यह भारत को Suez Canal या Red Sea की अस्थिरता से बचाते हुए एक alternate logistics corridor उपलब्ध कराएगा। 


 IMEC क्यों अहम है — भारत की रणनीति में बड़ा बदलाव

 Trade & Supply-chain Security: ट्रेड के लिए यह गलियारा shipping time में लगभग 40% तक की कमी ला सकता है। इससे भारत-EU, भारत-Middle East के व्यापार में तेज़ी आ सकती है, export competitiveness बढ़ेगी। 

 Strategic Autonomy & Geopolitics: यह चीन के नेतृत्व वाले Belt and Road Initiative (BRI) के मुकाबले वैकल्पिक मार्ग हो सकता है — भारतीय हितों को मजबूत करता है और Eurasia में influence balance देता है। 

 Energy & Resource Security: मध्य पूर्व से ऊर्जा, हाइड्रोजन या अन्य resources के निर्यात-आयात के लिए स्थिर, निर्भरतारहित मार्ग बनेगा। साथ ही Europe-India संयुक्त ऊर्जा सुरक्षा और निवेश cooperation को भी बल मिलेगा। 

 Economic Growth & Export Boost for India: भारत में coastal infrastructure, ports, logistics hubs, manufacturing zones, SEZs — सभी को boost मिलने की उम्मीद है। Export manufacturing, supply-chain logistics, job creation, trade facilitation से Indian economy को बड़ा फायदा होगा। 

Benefits of IMEC corridor for India infographic


 चुनौतियाँ और जोखिम

लेकिन इतना आसान नहीं है; IMEC को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा:

  • Geopolitical instability in West Asia / Middle East: ongoing conflicts, regional tensions, security risk से corridor की reliability पर असर हो सकता है। 

  • Infrastructure investment & coordination: ports, rail links, underwater cables, pipelines, customs protocols — इन सबके निर्माण, financing और देशों के बीच coordination की ज़रूरत है। इसे implement करना बेहद complex रहेगा। 

  • Dependency on political will & global stability: अगर किसी भी साझेदार देश में instability आई — तो corridor की पूरी viability डगमगा सकती है।

  • Competition from alternate routes / sea routes: Suez canal / Red Sea मार्ग अभी भी उपयोगी; alternate corridor के निर्माण में delays या cost overrun हो सकते हैं।

Challenges infographic for IMEC project

 भारत की रणनीति — IMEC से क्या उम्मीदें

अगर IMEC सफल हुआ, तो 2030–35 तक भारत:

  • एक logistics hub के रूप में उभरेगा — जिस पर goods, energy और data दोनों का global flow depend करेगा।

  • अपनी manufacturing और exports को EU, Middle East, Africa तक तेज़ी से पहुंचा पाएगा।

  • Eurasia में China-centric global supply-chain पर निर्भरता कम करेगा।

  • अपना geopolitical leverage बढ़ाएगा — supply-chain, energy, trade और diplomacy के मामलों में।

  • Coastal states, ports, infrastructure zones के आर्थिक विकास को boost मिलेगा; rural-to-urban migration कम हो सकती है, regional development balanced होगा।


Source: Public reports, official data, and verified open sources.
Category - Geopolitics


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